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शिवलिग कितना बड़ा होना चाहिए

योग शास्त्रों में मिला है वही दर्शाया जा रहा है

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भगवान शिवलिंग शिव का शिवलिंग निराकार और अनंत प्रकाश स्तंभ का प्रतीक है, जिसका मुख्य आकार अंडाकर या बेलनाकार होता है, जो ब्रह्मांडीय ऊर्जा को दर्शाता है। यह अक्सर गोल पीठम पर स्थापित होता है, जिसमें ऊपरी अंडाकार हिस्सा ‘परशिव’ (निराकार) और निचला भाग ‘शक्ति’ का प्रतिनिधित्व करता है
शिवलिंग के आकार और स्वरूप की मुख्य बातें:
आकार का रहस्य: यह निर्गुण-निराकार शिव का प्रतीक है, जो प्रकाश की अंतहीन लौ या ब्रह्मांडीय अंडा जैसा दिखता है।
वैज्ञानिक/मानव मस्तिष्क: कुछ शोध इसे मानव मस्तिष्क के निचले भाग के आकार से भी जोड़ते हैं।
घरेलू बनाम मंदिर: घर में पूजा के लिए शिवलिंग 11-12 अंगुल (लगभग 2-6 इंच) से छोटा और आमतौर पर नर्मदा नदी का (नर्मदेश्वर) गोल या अंडाकार होना चाहिए।
प्रकार: प्रमुख रूप से उल्कापिंड की तरह अंडाकार (ज्योतिर्लिंग) या मानव निर्मित पारे के (पारद) शिवलिंग होते हैं।
स्थान: शिवलिंग को हमेशा गोलाकार पीठम (योनि रूप) पर स्थित किया जाता है, जो शिव और शक्ति के मिलन का प्रतीक है
शिवलिंग भगवान शिव की ऊर्जा, ज्ञान और करुणा का निराकार प्रतीक है।


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