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मृतक में घंट फोड़ने का विधान और क्यों फोड़ा जाता है

घट फोड़ने का रहस्य

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मृतक काल में 11वें दिन घंट फोड़ने का विधान

हिंदू धर्म में मृत्यु के बाद 11वें दिन (एकादश) का अत्यंत महत्व है। इस दिन मृतक की आत्मा की शांति और उसे पितृ लोक भेजने के लिए विशेष अनुष्ठान किए जाते हैं। 11वें दिन ‘घट फोड़ने’ (मटकी फोड़ने) या ‘एकादश श्राद्ध’ का विधान मुख्य रूप से आत्मा का सांसारिक मोह तोड़ने और घर से विदाई के प्रतीक के रूप में किया जाता है।
11वें दिन घट फोड़ने और अनुष्ठान का विधान:
घट फोड़ने (मटकी फोड़ने) का अर्थ: मृत्यु के बाद से 10वें दिन तक घर में एक मटकी में पानी भरकर और उसमें छेद करके रखा जाता है, जो मृतक की आत्मा का प्रतीक माना जाता है। 11वें दिन इस मटकी को फोड़ना यह दर्शाता है कि आत्मा अब शरीर और घर के सांसारिक मोह से पूरी तरह मुक्त हो गई है।
दशा-गात्र और एकादश श्राद्ध: 10 दिनों तक पिंडदान से जो सूक्ष्म शरीर बनता है, उसे 11वें दिन के अनुष्ठान से गति मिलती है। इसे ‘एकादश’ कहा जाता है। इस दिन घर की शुद्धि (पंचगव्य से) की जाती है।
विशेष दान (डैनम): 11वें दिन 5 तरह के प्रमुख दान किए जाते हैं, जिसमें तिल, वस्त्र, सोना, जल का पात्र, और गाय (या उसके स्थान पर धन) शामिल हैं। यह मृतक के अगले जन्म या पितृलोक की यात्रा के लिए सहायक माना जाता है।
भोजन और ब्राह्मण भोज: इस दिन पवित्र ब्राह्मणों को भोजन कराया जाता है ताकि पितरों को तृप्ति मिले।
आत्मा का विसर्जन: मान्यता है कि 11वें से 13वें दिन के बीच आत्मा घर से विदा होकर यमलोक या पितृलोक की ओर प्रस्थान करती है, और घट फोड़ना इस अंतिम विदाई की रस्म का हिस्सा है।


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