
श्रीमद् भागवत कथा ज्ञान यज्ञ का आयोजन
श्रीमद् भागवत कथा ज्ञान यज्ञ का आयोजन के षस्टम दिवस पर भगवान श्री कृष्ण रुक्मणी विवाह की कथा को श्रवण कर श्रोता झूम उठे
रामपुर ग्राम सिलाई कठौतिया के पंडित गुलाब शंकर दुबे रवि शंकर दुबे राहुल दुबे के यहां चल रहे श्रीमद् भागवत की कथा में
आचार्य विष्णु कांत जी महाराज ने बताया कि रुक्मणी जी सदैव भगवान को अपना मानती थी और गौरी जी से पूजन के समय सदैव पति के रूप में श्री कृष्ण को ही मांगती थी
लेकिन रुक्मणी का भाई भगवान श्री कृष्ण से बैर रखना था
जिसके कारण रुक्मणी की शादी भगवान सेवा नहीं करना चाहता था लेकिन भाभियों के कहने से रुक्मणी जी ने एक पत्र लिखकर ब्राह्मण के द्वारा भगवान श्री कृष्ण के यहां भेज देती हैं
पत्र पढ़कर भगवान श्री कृष्णा उसी समय रुक्मणी के पास पहुंचते हैं जब रुक्मणी जी गौरी जी के मंदिर में जाकर के पूजन कर रही थी उसी समय भगवान श्री कृष्णा पहुंचकर के रुक्मणी जी को अपने साथ ले आते हैं
और पत्नी स्वीकार कर रुक्मणी जी के साथ महल में रहने लगते हैं
कथक प्रारंभ 29 सितंबर से चलकर समापन 5 अक्टूबर को होगा श्रीमद् भागवत कथा ज्ञान एकता आयोजन श्रीमद् भागवत कथा आयोजन की कसम दिवस पर भगवान श्री कृष्णा भगवान विवाह की कथा को छोड़कर सूत झूम उठेगा


