श्रीमद् भागवत कथा का आयोजन
गीता नगर अकोला महाराष्ट्र गजानन मंदिर पर चल रही श्रीमद् भागवत की कथा में कल षस्टम दिवस पर भगवान श्री कृष्णा और सुदामा मिलन की कथा को सुनकर भक्त भाव विभोर हो गए
आचार्य दशरथ जी महाराज ने बताया कि सुदामा एक सिद्धांत वादी भगवान श्री कृष्ण के बाल सखा और मित्र थे लेकिन भगवान श्री कृष्ण के मित्र होते हुए भी वह निर्धन कैसे हुए
महाराज जी ने बताया कि भगवान श्री कृष्णा और सुदामा जी गुरु सांदीपनि के यहां रहकर शिक्षा ग्रहण कर रहे थे एक दिन भगवान श्री कृष्णा लकड़ी इकट्ठा करने के लिए गए हुए थे
गुरु माता ने सुदामा से कहा कि कृष्ण को आने में देर हो रही है यह चना श्री कृष्ण को दे दो और वह चना श्रापित था सुदामा जी त्रिकालदर्शी थे इस बात को जानते थे
सुदामा जी ने विचार किया की चना है जो इसको खाएगा वह आजीवन दरिद्र हो जाएगा ऐसा श्राप था इसलिए अगर भगवान श्री कृष्ण को चना में दे देता हूं खाने के बाद दरिद्र हो जाएंगे तो इस संसार का क्या होगा
भगवान को बचाने के लिए सुदामा जी ने चना स्वयं ग्रहण कर लिया खा लिया उसी के कारण भगवान के मित्र होते हुए भी वह निर्धन हो गए


