
ग्राम देवी या कुलदेवी की मूर्ति का स्थानांतरण एक अत्यंत संवेदनशील और धार्मिक प्रक्रिया है, जिसमें विशेष सावधानी और विधि-विधान की आवश्यकता होती है। यह प्रक्रिया माता से अनुमति लेने और उन्हें ससम्मान नए स्थान पर ले जाने से संबंधित है।
ग्राम देवी की मूर्ति स्थानांतरण की चरण-दर-चरण विधि इस प्रकार है:
1. स्थानांतरण से पूर्व की तैयारी (न्योता देना)
अनुमति/न्योता: पुराने स्थान से मूर्ति हटाने से पहले, देवी मां से नए स्थान पर चलने के लिए निवेदन करें। पांच प्रकार के फल, मिठाई, वस्त्र, दक्षिणा, अक्षत, और दुर्गा घास के साथ विधिवत पूजा करके उन्हें ‘न्योता’ दें।
मनौती: माता से प्रार्थना करें कि वे पुराने स्थान की अपनी शक्ति के साथ नए घर या मंदिर में चलें और परिवार का कल्याण करें।
समय: यह न्योता स्थापना के एक या दो दिन पहले दिया जा सकता है।
2. नए स्थान पर तैयारी
सफाई और सजावट: नए स्थान (मंदिर या घर) को अच्छी तरह साफ करें, तोरण द्वार, आम के पत्ते, और फूलों की माला से सजाएं।
आसन: माता के विराजमान होने के लिए एक नया आसन या चौकी तैयार करें।
3. मूर्ति को ले जाने की विधि
स्नान और पूजा: पुराने स्थान पर माता की अंतिम पूजा करें। यदि संभव हो, तो उन्हें गंगाजल से स्नान कराएं।
ससम्मान उठाना: माता की मूर्ति को पीले या लाल कपड़े में लपेटकर, सिर पर उठाकर ले जाना सबसे उत्तम माना जाता है। मूर्ति को कभी भी सीधे जमीन पर न रखें।
भजन/कीर्तन: माता को ले जाते समय भक्ति भाव से भजन या कीर्तन करें।
4. नए स्थान पर स्थापना
स्थापना: नए स्थान पर विधि-विधान से माता को स्थापित करें।
पूजा-अर्चना: गणेश जी का स्मरण करने के बाद मुख्य देवी की पूजा करें। उन्हें नए वस्त्र, फूल, और भोग अर्पित करें।
हवन: स्थानांतरण को पूर्ण करने के लिए नए स्थान पर छोटा सा हवन जरूर करें, इससे पुराने स्थान की ऊर्जा नए स्थान पर आ जाती है।
5. महत्वपूर्ण सावधानियां
विधि-विधान: यदि संभव हो, तो किसी योग्य ब्राह्मण या पंडित के मार्गदर्शन में ही यह प्रक्रिया करें।
टूटी मूर्ति: यदि मूर्ति खंडित हो, तो उसे स्थापित न करें, उसे जल में प्रवाहित कर नई मूर्ति स्थापित करें।
दिशा: मूर्ति का मुख पूर्व या उत्तर दिशा की ओर होना चाहिए
नोट: यह जानकारी पारंपरिक मान्यताओं पर आधारित है, स्थानीय परंपराओं के अनुसार इसमें थोड़ा बदलाव हो सकता है।


