उत्तरप्रदेश
यजमान को बहकाना किस श्रेणी में आता है
एक इंटरव्यू में आचार्य पंडित दशरथ दुबे जी ने जो बताया वह सभी को चौंकाने वाला है

सभी शास्त्रों में यही है कि यजमान को बहकाना (धोखा देना, झूठ बोलना या अनुचित तरीके से धन लेना) निश्चित रूप से पाप की श्रेणी में आता है, न कि पुण्य।
यहाँ धार्मिक और सामाजिक दृष्टिकोण दिए गए हैं:
नैतिक पतन: सामाजिक और आध्यात्मिक मूल्यों के अनुसार, किसी को विश्वास में लेकर उसे गुमराह करना पाप है।
कर्म का फल: यदि कोई पुरोहित या गुरु अपने स्वार्थ के लिए यजमान को गलत जानकारी देता है, तो वह पाप का भागीदार बनता है।
प्रायश्चित: शास्त्रों के अनुसार, अनजाने में या अज्ञानता वश किए गए गलत कृत्य का प्रायश्चित किया जा सकता है, लेकिन यजमान को जानबूझकर बहकाना घोर पातक माना जा सकता है
निष्कर्ष: यजमान भगवान का रूप माना जाता है। इसलिए, उन्हें बहकाना या ठगना कर्मकांड और नैतिकता के विपरीत है।


