उत्तरप्रदेश

अपने यहां सूतक पड़ने पर पंडितों को पूजा पाठ करना चाहिए या नहीं इसका निर्णय क्या है

आचार्य पंडित दशरथ दुबे 9918 670 276 संपादक सिद्धांत फास्ट न्यूज़

Siddhant Fast News

पंडित के घर में सूतक (जन्म या मृत्यु) लगने पर, अशुद्धि के कारण वे आमतौर पर बाहरी पूजा-पाठ, अनुष्ठान या मंदिर में पूजा नहीं कर सकते। इस अवधि में वे घर के मंदिर में भी पूजा नहीं करते हैं। हालांकि, साधक के रूप में वे मानसिक जप, मंत्र उच्चारण या गीता पाठ कर सकते हैं। 12-13 दिनों (सपिंडीकरण) के बाद शुद्धि होने पर ही सामान्य पूजा-पाठ शुरू किया जा सकता है।
मुख्य नियम:
वर्जित: मूर्ति पूजा, हवन, यज्ञानुष्ठान, और घर के मंदिर में दीपक जलाना या पूजा करना वर्जित है।
अनुमति: मानसिक पूजा, नाम जप, और मानसिक तौर पर गीता का पाठ किया जा सकता है।
अवधि: जन्म या मृत्यु के बाद आम तौर पर 10-13 दिनों तक सूतक माना जाता है।
अपवाद: यदि घर में लड्डू गोपाल हैं, तो उन्हें घर की ही अन्य महिला या बेटी द्वारा नित्य सेवा पूजा दी जा सकती है।
नोट: शास्त्रीय मतों के अनुसार सूतक में अशुद्धि मानी जाती है, इसलिए पंडित जी को 12-13 दिनों तक कर्मकांड से बचना चाहिए।


Siddhant Fast News

Related Articles

Back to top button