श्रवण कुमार के माता-पिता अंधे कैसे हुए
आचार्य पंडित दशरथ दुबे 9918 670 276 राष्ट्रीय अध्यक्ष मानवाधिकार न्याय संस्थान भारत संपादक सिद्धांत फास्ट न्यूज़

पौराणिक कथाओं के अनुसार, श्रवण कुमार के माता-पिता अपने पुत्र से अत्यधिक प्रेम करते थे और उन्हें देखते ही उन पर अपार स्नेह उमड़ पड़ता था। कथाओं के अनुसार, जब उन्होंने पहली बार अपने पुत्र श्रवण कुमार को गोद में उठाया, तो उस समय अत्यधिक भावातिरेक या उनके लाड-दुलार के कारण ही उनकी आंखों की रोशनी चली गई थी और वे अंधे हो गए थे।
इस घटना से संबंधित अन्य जानकारी इस प्रकार है:
पुत्र के प्रति प्रेम: माता-पिता के नेत्रहीन होने के बाद भी श्रवण कुमार ने उनकी नि:स्वार्थ सेवा की।
तीर्थ यात्रा: श्रवण कुमार अपने अंधे माता-पिता को कांवड़ में बैठाकर तीर्थ यात्रा पर ले गए थे, जो उनकी पितृ-भक्ति का प्रतीक है।
श्राप का कारण: राजा दशरथ द्वारा अनजाने में श्रवण कुमार का वध करने के बाद, उनके माता-पिता ने पुत्र वियोग में तड़पकर अपने प्राण त्यागने से पहले दशरथ को भी पुत्र वियोग में मृत्यु का श्राप दिया था।
संक्षेप में, श्रवण कुमार के माता-पिता का अंधापन उनके प्रेम की एक भावनात्मक घटना से जुड़ा हुआ बताया गया है।


