महामृत्युंजय का जप कहां पर किया जाए कि यजमान का कल्याण हो और उसका नियम क्या है
आचार्य पंडित दशरथ दुबे 9918 670 276 राष्ट्रीय अध्यक्ष मानवाधिकार न्याय संस्थान भारत संपादक सिद्धांत फास्ट न्यूज़

महामृत्युंजय जाप (अनुष्ठान) के नियमों के अनुसार, विद्वानों (ब्राह्मणों) को जजमान (जिसके लिए अनुष्ठान हो रहा है) के घर आना चाहिए। हालाँकि, यदि विशेष परिस्थिति हो, तो अनुष्ठान किसी मंदिर या किसी अन्य पवित्र स्थान पर भी किया जा सकता है।
अनुष्ठान से जुड़ी मुख्य बातें:
जजमान का घर/मंदिर: अनुष्ठान जजमान के घर या शिव मंदिर में किया जाता है, जहाँ विद्वान आकर अनुष्ठान संपन्न करते हैं।
संकल्प: सबसे पहले जजमान (स्वयं या परिवार के सदस्य) के नाम का संकल्प लिया जाता है, जिसके बाद ही विद्वान जाप शुरू करते हैं।
शुद्धता और स्थान: स्थान बिल्कुल शांत और शुद्ध होना चाहिए। उत्तर दिशा की ओर मुख करके अनुष्ठान करना सर्वोत्तम माना जाता है।
125000 जाप: आमतौर पर महामृत्युंजय जाप 125,000 बार किया जाता है, जिसके बाद हवनादि किया जाता है।
संक्षेप में: ब्राह्मणों को जजमान के घर जाकर ही जाप करना चाहिए, क्योंकि इसमें जजमान की उपस्थिति और संकल्प सबसे महत्वपूर्ण है।


